Pages

Tuesday, November 8, 2011

'मिर्झा गालिब' सीरीयलके लिये जगजीत सिंहकी गायी एक गझल


न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता
डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता
हुआ जब गमसे युं बेहिस, तो गम क्या सर कटने का
न होता गर जुदा तनसे, तो झानों पर धरा होता
हुइ मुद्दत के 'गालिब'मर गया,पर याद आता है
वो हर इक बात पे कहते के, यूं होता तो क्या होता.

No comments:

Post a Comment